श्री हित चौरासी जी – श्री हित हरिवंश गोस्वामीन विरचित
“लीला जुगल दरसि ज्यौं परी, तैसैं पद करि वरणन करी।”श्रीहित हरिवंश महाप्रभु जी ने अपने दिव्य नेत्रों से जिस प्रकार निभृत निकुंज में श्री प्रियाप्रियतम की लीला-विलास को प्रत्यक्ष देखा, उसी रस में डूबकर उन्होंने उसे अपनी अनुपम वाणी “श्री हित चौरासी जी “ में शब्दबद्ध किया — ज्यों की त्यों। श्री हित चौरासी जी— […]
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