Vrindavan Ras Charcha

Hindi

Laagi Rat, Radha Shri Radha Naam" verse by Shri Hariram Vyas Ji, highlighting Radha Rani's divine presence and the poet's heartfelt devotion.

लागी रट, राधा श्रीराधा नाम।

लागी रट, राधा श्रीराधा नाम। ढूँढ़ फिरी वृन्दावन सगरौ, नन्द ढिठौना स्याम॥ [1] कै मोहन या खोर साँकरी, कै मोहन नँदगांम। श्री व्यासदास की जीवन राधे, धन बरसानौ गाँम॥ [2] – श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (39) अब मैंने श्री राधा नाम की रटना लगा दी है। समस्त वृंदावन में खोजने का प्रयास किया, […]

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Shri Chhabiledas Ji immersed in divine devotion, surrounded by symbols of his love for Shri Rangilal Ji and Shri Radha Ji.

श्री छबीलेदास जी

श्री छबीलदास जी का जन्म देववन के एक तमोरी परिवार में हुआ, लेकिन उनके जीवन की कहानी केवल जन्म से नहीं, बल्कि उनके अनन्य प्रेम और भक्ति से लिखी गई थी। ये बाल्यकाल से ही गोस्वामी श्रीहित हरिवंशजी के अभिन्न मित्र थे। जब हरिवंशजी मात्र सात वर्ष के थे, तो उन्होंने एक कुएँ से श्री

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Shri Hariram Vyas Ji: The Rasik Saint of Vrindavan

श्री हरिराम व्यास जी की जीवनी (विशाखा सखी अवतार)

श्री हरिराम व्यास जी ओरछा (बुन्देलखण्ड) के निवासी श्रीसुमोखन जी शुक्ल के पुत्र रत्न थे। ओरछा राज्य के राजगुरु जैसे कुलीन परिवार में जन्म लेने के कारण राजा एवं प्रजा दोनों ही इनका अत्यन्त सम्मान किया करते थे। ये अपने समय के एक अद्वितीय विद्वान थे। इन्होंने शास्त्रों-पुराणों का गहन अध्ययन किया था, जिसके कारण

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"Humare Mai Syama Ju ko raj" verse by Shri Vitthal Vipul Dev Ji Maharaj, describing the divine rule of Shree Radha Rani and Lord Krishna's devotion to her.

हमारें माई स्यामा जू कौ राज

हमारें माई स्यामा जू कौ राज |  जाके अधीन सदाई साँवरौ या ब्रज कौ सिरताज ||  यह जोरी अविचल वृन्दावन नाहिं आन सों काज |  श्री विट्ठल विपुल बिहारिनि के बल दिन जलधर ज्यौ गाज ||  – श्री विठ्ठल विपुल देव जी महाराज, श्री विट्ठल विपुल देव जी की वाणी (27)   हमारी माई (सखी)

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Shree Radha Baba's verse 'He Vrishabhanu Sute Lalite' expressing deep longing for Radha Rani’s mercy.

हे वृषभानु सुते ललिते, मम कौन कियो अपराध तिहारो?

हे वृषभानु सुते ललिते, मम कौन कियो अपराध तिहारो? काढ़ दियो ब्रज मंडल से, अब और भी दंड दियो अति भारो। सो कर ल्यो, आपनों कर ल्यो, निकुंज कुटी यमुना तट प्यारो। आप सों जान दया के निधान, भई सो भई अब बेगी सम्हारो। – श्री राधा बाबा यह जो पद है, श्री राधा बाबा

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Shree Radha Baba meditating, reflecting his life of simplicity and devotion

श्री राधा बाबा जी की जीवनी

श्री राधा बाबा: गोरखपुर के महान संत और उनकी आध्यात्मिक यात्रा श्री राधा बाबा का नाम भारतीय आध्यात्मिकता के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। गोरखपुर के इस महान संत ने जीवनभर अपने सिद्धांतों और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया। हालांकि, श्री राधा बाबा ने अपने

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Hit Safut Vani - Sacred Teachings by Shri Hit Harivansh Mahaprabhu Ji

रहौ कोऊ काहू मनहि दिये।- श्री हित स्फुट वाणी पद 20

रहौ कोऊ काहू मनहि दिये। मेरे प्राणनाथ श्री श्यामा सपथ करौं तृण छिये ।। जे अवतार कदंब भजत हैं धरि दृढ़ ब्रत जु हिये। तेऊ उमगि तजत मर्जादा वन बिहार रस पिये।। खोये रतन फिरत जे घर-घर कौन काज जिए । (जैश्री) हित हरिवंश अनत सचु नाहीं बिनु या रजहिं लिये।। – श्री हित हरिवंश

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Shri Sevak Ji Maharaj in Vrindavan.

श्री सेवक जी (दामोदरदास जी): भक्ति, सेवा और गुरु अनन्य निष्ठा के प्रतीक

सेवक सम सेवक नहीं कोई दामोदरदास जी “सेवक जी” के नाम से प्रसिद्ध हो गए, क्योंकि उनकी तरह सेवा-धर्म का पालन करने वाला और कोई उदाहरण मिलना मुश्किल था। वे सभी हितधर्मियों में अग्रणी थे। श्री हित हरिवंशचन्द्र जी महाराज  का नाम और उनकी वाणी उन्हें अपने दामोदरदास जी “सेवक जी” के नाम से प्रसिद्ध

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shree hit harivansh mahaprabhu ji ki jeevani

श्री हरिवंश महाप्रभु जी का जीवन चरित्र

श्री हित हरिवंश चंद्र महाप्रभु जी का जीवन परिचय​ परिचय : राधावल्लभ संप्रदाय के गोस्वामी श्री हित रूपलाल जी ने अपने सहचरी वपु से श्री श्यामा श्याम की एक लीला का दर्शन किया, जिसे वे स्वयं वर्णन कर रहे हैं – रास मध्य ललिता जु प्रार्थना जु कीनी। कर ते सुकुमारी प्यारी वंशी तब दिनी।।

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